वे कहते हैं।
कहते है,
वे दावेदार हैं तजुर्बों के,
लेकिन नई चुनौतियों से कतराते है,
तोल- मोल कर हर पहलू को
नए तजुर्बे गढ़ते है।
( और कहते है)
हम कार्य तुम्हे बतलायेंगे,
तुम मोर्चा लेकर बढ़े चलो,
गर मोर्चे में असफल हुए
हम तुमको उत्तरदायी बतलायेंगे
गर सफल हुए तुम मोर्चे में,
तो वह नेतृत्व हमारा था।
कहते है, वे सच्चाई का दम भरते है,
लेकिन मुकरना तो अभिव्यक्ति की आजादी है,
पक्ष- विपक्ष को जांच परखकर
अपनी बात सजाते है।
(और कहते है)
तेरी काबिलियत हम तुमको बतलायेंगे
तुम सच का दामन थामे रहना,
गर सच्चाई उन्हें कड़वी लगी,
तो यह जिम्मेदारी तुम्हारी थी,
गर उन्होंने सच्चाई को महसूस किया,
तो वह एहसान हमारा था।
कहते हैं बड़े बेफिक्र है हम,
लेकिन उलझे पड़े जमाने मे,
हर जिक्र की फिक्र हम करते है,
अपनी साख बचाने में।
( और कहते है)
हम जरिया तुम्हे बताएंगे,
तुम आगे चलना जारी रखना
जो गिर पड़ो तुम राह में, हम
नजरों का दोष गिनवाएँगे,
जो पा लो अपनी मंजिल तुम,
हम क्रेडिट लेने आएंगे।
©आकांक्षा मिश्रा
वे दावेदार हैं तजुर्बों के,
लेकिन नई चुनौतियों से कतराते है,
तोल- मोल कर हर पहलू को
नए तजुर्बे गढ़ते है।
( और कहते है)
हम कार्य तुम्हे बतलायेंगे,
तुम मोर्चा लेकर बढ़े चलो,
गर मोर्चे में असफल हुए
हम तुमको उत्तरदायी बतलायेंगे
गर सफल हुए तुम मोर्चे में,
तो वह नेतृत्व हमारा था।
कहते है, वे सच्चाई का दम भरते है,
लेकिन मुकरना तो अभिव्यक्ति की आजादी है,
पक्ष- विपक्ष को जांच परखकर
अपनी बात सजाते है।
(और कहते है)
तेरी काबिलियत हम तुमको बतलायेंगे
तुम सच का दामन थामे रहना,
गर सच्चाई उन्हें कड़वी लगी,
तो यह जिम्मेदारी तुम्हारी थी,
गर उन्होंने सच्चाई को महसूस किया,
तो वह एहसान हमारा था।
कहते हैं बड़े बेफिक्र है हम,
लेकिन उलझे पड़े जमाने मे,
हर जिक्र की फिक्र हम करते है,
अपनी साख बचाने में।
( और कहते है)
हम जरिया तुम्हे बताएंगे,
तुम आगे चलना जारी रखना
जो गिर पड़ो तुम राह में, हम
नजरों का दोष गिनवाएँगे,
जो पा लो अपनी मंजिल तुम,
हम क्रेडिट लेने आएंगे।
©आकांक्षा मिश्रा
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